Songs from Chhattisgarh

April 4, 2017

 का कदम

क्रांति का कदम ,जिसमे है यह दम

कभी नहीं रुक सकता

जड़ से मितादेंगे, पूंजीवाद की सत्ता

 

हमको दर कभी नहीं है., फंसी के फंदे से

अपना लहू सीचेंगे

गाँव शेहेर और कसबे

खून पसीना से जो भी टकराएगा

चूर चूर हो जायेगा

क्रांति का कदम , जिसमे है यह दम

कभी नहीं रुक सकता

 

जेलों और बन्दूक से

डरने वाले हम नहीं हैं

क्रांति की यह धरा है

रुकने वाली यह नहीं है

नौ जवानो की निकलेगी जब डोली

हर के मुंख पर होगी इन्क़ुइलाब की बोली

क्रांति का कदम…

 

मजदूर और किसान निकले है सीनातन

बहनों की एकता इन्क़ुइलाब की पहचान

लाल हरा लहरायंगे सर कभी नाह झुकांगे

सदी गली व्यवस्था को जड़ से मिटायेंगे

ढांचा को बदलेंगे संकल्प हमारा है

अमर शहीदों के राहों का सहारा है

क्रांति का कदम ..

 

जेलों की सलाखें हो

लोहे की बेदी हो

रोक नहीं सकता मजबूत हतेली हो

मितादेंगे इनके हलिशान हवेली को

जोह भी तूफ़ान आये उनसे लड़ जायेंगे

जोह भी दिवार आये उनसे तक्दयेंगे

क्रांति का कदम…